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हरतालिका तीज पूजा

पार्वती की तपस्या, मिट्टी के शिव-पार्वती और गीतों की रात

सामान्य विधि — अधिकांश घर

हरतालिका तीज, भाद्रपद शुक्ल तृतीया, पूजा भोर या शाम को। मुहूर्त ऐप के त्योहार कार्ड पर दिन दिखता है।

लगभग 45 मिनट; व्रत पूरे दिन

पार्वती की सखियाँ उन्हें वन ले गईं ताकि वे शिव के लिए तप करें, और यह व्रत उनके संकल्प को याद करता है। विवाहित और अविवाहित महिलाएँ मिट्टी के शिव-पार्वती बनाती हैं, कथा सुनती हैं और प्रायः गीत गाकर जागती हैं। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः" कह सकते हैं।

इस पूजा की प्रार्थनाएँ

Shubham Karoti ›Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›

तैयारी

एक दिन पहले

उसी दिन

आपको क्या चाहिए

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थाली में

अर्पण के लिए

पूजा

  1. दीया जलाएँ

    दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।

    शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।

    Shubham Karoti ›

  2. गणेश जी का स्मरण

    हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।

    वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।

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  3. संकल्प — अपना उद्देश्य कहें

    दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।

  4. ध्यान — देवता का आवाहन

    आँखें बंद करके देवता को अपने सामने देखें। उन्हें पधारने का निमंत्रण देते हुए एक चुटकी अक्षत अर्पित करें।

    ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः। ध्यायामि, आवाहयामि॥
  5. मूर्तियाँ रखें

    मिट्टी की मूर्तियाँ साफ़ पटरे पर, ऊपर मंडप के साथ रखें। जल धीरे अर्पित करें; मिट्टी जल्दी गलती है।

  6. पत्ते और श्रृंगार

    बिल्व और फूल शिव को, चूड़ियाँ, कुमकुम और वस्त्र पार्वती को अर्पित करें। हर एक के साथ मंत्र कहें।

    ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥
  7. धूप

    अगरबत्ती जलाकर देवता के सामने घड़ी की दिशा में तीन बार धीरे से घुमाएँ। घंटी हो तो बाएँ हाथ से बजाएँ।

    ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः। धूपम् आघ्रापयामि॥
  8. दीप

    दीया उठाकर देवता को दिखाएँ और घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएँ।

    ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः। दीपं दर्शयामि॥
  9. नैवेद्य — भोग

    भोग देवता के सामने रखें। उसके चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें और हाथ जोड़कर अर्पित करें। एक क्षण रुकें, मानो उसे स्वीकार किया जा रहा हो।

    ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥
  10. कथा सुनें

    साथ कथा पढ़ें: कैसे पार्वती ने हर अन्य रिश्ता ठुकराया और अपने तप से शिव को पाया। हाथ में थोड़े चावल रखें और अंत में अर्पित करें।

  11. क्षमा प्रार्थना

    हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।

    आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।
  12. रात और विसर्जन

    हो सके तो गाएँ या जागरण करें। अगली सुबह छोटी आरती के बाद व्रत खोलें, मिट्टी की मूर्तियाँ पानी के टब में रखें, फिर वह जल पौधों में डालें।

उपवास

कठोर रूप में पूरे दिन-रात न अन्न न जल। अस्वस्थ, गर्भवती, मधुमेह वाली या दवा ले रही महिलाएँ निर्जल व्रत न रखें; फल और जल पूरी तरह स्वीकार्य हैं।

करना अच्छा है

परंपरा टालती है

पार्वती ने स्वयं चुना और झुकीं नहीं। यहाँ महिलाएँ इसी का उत्सव मनाती हैं।

परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।

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