मकर संक्रांति पूजा
उत्तरायण पर सूर्य को धन्यवाद: तिल, गुड़ और दान
सामान्य विधि — अधिकांश घर
मकर संक्रांति, जब सूर्य मकर में प्रवेश करें, लगभग 14 जनवरी, सुबह। मुहूर्त ऐप के त्योहार कार्ड पर पुण्य काल दिखता है।
लगभग 20 मिनट
सूर्य मकर में आते हैं और नई फ़सल घर आती है। परिवार जल्दी स्नान करते हैं, सूर्य को जल देते हैं, तिल-गुड़ खाते हैं और दान करते हैं। नाम और भोजन क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं: तिल-गुड़, खिचड़ी, पोंगल। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "ॐ सूर्याय नमः" कह सकते हैं।
इस पूजा की प्रार्थनाएँ
Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›Surya Shloka ›Surya Namaskar Names ›
तैयारी
एक दिन पहले
- तिल-गुड़ या तिल के लड्डू बनाएँ, और खिचड़ी या क्षेत्रीय व्यंजन की तैयारी करें।
- दान के लिए अनाज, तिल या कंबल अलग रखें।
सुबह
- सूर्योदय से पहले या तुरंत बाद स्नान करें; जल में थोड़ा तिल डालना परंपरा है।
- उगते सूर्य की ओर मुख वाली जगह चुनें।
आपको क्या चाहिए
सूर्य के लिए
- 1जल भरा ताँबे का लोटा
- थोड़ालाल फूल और चावल
- 1 थालीतिल-गुड़ की मिठाई
- 1 कटोरीखिचड़ी या क्षेत्रीय व्यंजन
- चुटकी भरतिल
- यथाशक्तिदान की वस्तुएँ
पूजा स्थान के लिए
- 1उसे रखने के लिए साफ़ कपड़ालाल या पीला परंपरागत है।
- 1पूजा की थाली
थाली में
- 1रुई की बाती वाला दीयाघी या तिल का तेल।
- 2अगरबत्ती
- एक-एक चुटकीकुमकुम और हल्दी
- थोड़ाचंदनचंदन न हो तो कुमकुम लें।
- 1 बड़ा चम्मचअक्षत — थोड़े कुमकुम में मिले साबुत चावल
- एक मुट्ठीताज़े फूल
- 1चम्मच के साथ स्वच्छ जल का छोटा पात्र
- 1छोटी घंटीवैकल्पिक।
अर्पण के लिए
- थोड़ाफल, गुड़, मिश्री या घर में ताज़ा बना कुछ भी
- 1 या 2 टुकड़ेआरती के लिए कपूरवैकल्पिक; इसकी जगह दीया लिया जा सकता है।
पूजा
शांत होकर बैठें
आसन या मुड़े कपड़े पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके देवता के सामने बैठें। थाली अपने दाहिनी ओर रखें। एक गहरी साँस लें और कुछ मिनट के लिए दिन को रुकने दें।
गणेश जी का स्मरण
हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।
सूर्य को अर्घ्य
सूर्य की ओर मुख करें। लोटे में फूल, चावल और तिल डालें, दोनों हाथों से उठाएँ, और श्लोक कहते हुए धीरे जल गिराएँ।
ॐ सूर्याय नमः। जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥नैवेद्य
मिठाई और व्यंजन सूर्य के चित्र के सामने या खुले में रखें। चारों ओर जल छिड़ककर हाथ जोड़कर अर्पित करें।
क्षमा प्रार्थना
हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।दान
अनाज, तिल, कंबल या भोजन ज़रूरतमंद को दें। आज परंपरा इसी पर सबसे अधिक बल देती है।
तिल-गुड़ बाँटें
तिल की मिठाई परिवार और पड़ोसियों को मीठे शब्द के साथ दें: महाराष्ट्र में "तिळगूळ घ्या, गोड गोड बोला"।
उपवास
व्रत आवश्यक नहीं। कुछ लोग अर्घ्य के बाद ही खाते हैं।
करना अच्छा है
- पतंग तारों से दूर, और खुली छत से ही उड़ाएँ।
- एक बिगड़ा रिश्ता सुधारें; मीठा बोल ही इस दिन की रीत है।
परंपरा टालती है
- काँच लगा माँझा न लें; इससे पक्षी और लोग घायल होते हैं।
- सूर्य को सीधे न देखें; गिरते जल को देखें।
सूर्य बिना माँगे देते हैं। एक लोटा जल और कुछ दिया हुआ वही भाव लौटाता है।
परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।