राम नवमी पूजा
दोपहर में राम जन्म: पालना, पानक और उनका नाम
सामान्य विधि — अधिकांश घर
राम नवमी, चैत्र शुक्ल नवमी, मुख्य पूजा दोपहर, मध्याह्न में। मुहूर्त ऐप के त्योहार कार्ड पर समय दिखता है।
लगभग 40 मिनट
राम का जन्म दोपहर में हुआ, इसलिए परिवार मध्याह्न में उनके स्वागत के लिए एकत्र होता है। छोटी मूर्ति पालने में रखी जाती है, गर्मी के लिए ठंडे पेय चढ़ते हैं, और उनका नाम जपा जाता है। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "श्री राम जय राम जय जय राम" कह सकते हैं।
इस पूजा की प्रार्थनाएँ
Shubham Karoti ›Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›Ramaya Rama Bhadraya ›Sri Rama Rama Rameti ›Om Jai Jagdish Hare ›
तैयारी
एक दिन पहले
- पूजा स्थान साफ़ करें और हो तो छोटा पालना सजाएँ।
- तुलसी, फूल, गुड़, सोंठ और इलायची पानक के लिए लें।
सुबह
- स्नान करें और चाहें तो दोपहर तक व्रत रखें।
- पानक और छाछ या कोसंबरी बनाएँ, और पढ़ते हों तो रामायण या राम रक्षा पास रखें।
आपको क्या चाहिए
राम के लिए
- 1राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान का चित्र या मूर्ति
- 1छोटा पालना, फूलों के साथवैकल्पिक।
- एक मुट्ठीतुलसी के पत्ते
- 1 जगपानक: सोंठ और इलायची वाला गुड़ का पानी
- 1 थालीकोसंबरी, छाछ या खीर
- 1रामायण, या राम रक्षा का पन्नावैकल्पिक।
पूजा स्थान के लिए
- 1उसे रखने के लिए साफ़ कपड़ालाल या पीला परंपरागत है।
- 1पूजा की थाली
थाली में
- 1रुई की बाती वाला दीयाघी या तिल का तेल।
- 2अगरबत्ती
- एक-एक चुटकीकुमकुम और हल्दी
- थोड़ाचंदनचंदन न हो तो कुमकुम लें।
- 1 बड़ा चम्मचअक्षत — थोड़े कुमकुम में मिले साबुत चावल
- एक मुट्ठीताज़े फूल
- 1चम्मच के साथ स्वच्छ जल का छोटा पात्र
- 1छोटी घंटीवैकल्पिक।
अर्पण के लिए
- थोड़ाफल, गुड़, मिश्री या घर में ताज़ा बना कुछ भी
- 1 या 2 टुकड़ेआरती के लिए कपूरवैकल्पिक; इसकी जगह दीया लिया जा सकता है।
पूजा
शांत होकर बैठें
आसन या मुड़े कपड़े पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके देवता के सामने बैठें। थाली अपने दाहिनी ओर रखें। एक गहरी साँस लें और कुछ मिनट के लिए दिन को रुकने दें।
आचमन — तीन बार जल पिएँ
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ, हर घूँट के साथ पहले तीन नाम बोलें। फिर चौथा नाम बोलते हुए थोड़े जल से दाहिना हाथ धो लें।
ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः। ॐ गोविन्दाय नमः॥केशव, नारायण और माधव को नमस्कार; गोविंद को नमस्कार।स्वयं और स्थान को पवित्र करें
जल में डुबोया एक फूल लेकर यह श्लोक बोलते हुए अपने ऊपर, थाली और पूजा स्थान पर कुछ बूँदें छिड़कें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥पवित्र हो या अपवित्र, किसी भी अवस्था में हो, जो कमलनयन भगवान का स्मरण करता है वह भीतर और बाहर से शुद्ध हो जाता है।दीया जलाएँ
दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।गणेश जी का स्मरण
हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।
ध्यान — देवता का आवाहन
आँखें बंद करके देवता को अपने सामने देखें। उन्हें पधारने का निमंत्रण देते हुए एक चुटकी अक्षत अर्पित करें।
ॐ श्री रामाय नमः। ध्यायामि, आवाहयामि॥दोपहर — जन्म
मध्याह्न आते ही सबको बुलाएँ। घंटी या शंख बजाएँ, और आनंद से उनका नाम पुकारें। छोटी मूर्ति पालने में रखकर धीरे झुलाएँ।
गंध — चंदन
अनामिका उँगली से देवता को चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएँ।
ॐ श्री रामाय नमः। गन्धं समर्पयामि॥पुष्प — फूल
फूल देवता के चरणों में एक-एक या कुछ एक साथ अर्पित करें।
ॐ श्री रामाय नमः। पुष्पाणि समर्पयामि॥धूप
अगरबत्ती जलाकर देवता के सामने घड़ी की दिशा में तीन बार धीरे से घुमाएँ। घंटी हो तो बाएँ हाथ से बजाएँ।
ॐ श्री रामाय नमः। धूपम् आघ्रापयामि॥दीप
दीया उठाकर देवता को दिखाएँ और घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएँ।
ॐ श्री रामाय नमः। दीपं दर्शयामि॥नैवेद्य — पानक
पानक, कोसंबरी और फल उनके सामने रखें, हर एक पर तुलसी का पत्ता। चारों ओर थोड़ा जल छिड़ककर हाथ जोड़कर अर्पित करें।
स्तुति करें
यह श्लोक साथ कहें।
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥राम को, रामभद्र को, रामचंद्र को, विधाता को, रघुनाथ को, सीता के पति को नमस्कार।नाम जपें
माला पर 108 बार "राम" जपें, या बालकांड का वह अध्याय पढ़ें जिसमें उनका जन्म है।
राम॥आरती
दीप या कपूर जलाकर परिवार के साथ ॐ जय जगदीश हरे गाएँ, और लौ दक्षिणावर्त घुमाएँ।
प्रदक्षिणा — श्रद्धा से परिक्रमा
यह श्लोक बोलते हुए अपने स्थान पर घड़ी की दिशा में तीन बार घूमें (जगह हो तो पूजा स्थान की परिक्रमा करें)।
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे॥पिछले जन्मों में किए गए जो भी पाप हैं, वे भगवान की परिक्रमा के हर कदम के साथ नष्ट हो जाते हैं।क्षमा प्रार्थना
हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।पानक बाँटें
पानक और कोसंबरी सबको दें, और हो सके तो राह चलते लोगों को भी। गर्मी में अजनबी को ठंडा पेय देना परंपरा में पूजा ही माना गया है।
उपवास
कई लोग दोपहर की पूजा तक या दिन भर फल और दूध पर व्रत रखते हैं। बुज़ुर्ग, बच्चे, अस्वस्थ और गर्भवती लोग ज़रूरत के अनुसार खाएँ।
करना अच्छा है
- बच्चों को उनके जन्म की कथा पढ़कर या सुनाकर बताएँ।
- धूप में काम करने वाले को पानी या ठंडा पेय दें।
परंपरा टालती है
- दोपहर का समय यूँ न जाने दें; यही दिन का सार है, पर बाद की पूजा भी पूजा ही है।
- अर्पित भोजन में प्याज़ और लहसुन न रखें।
राम वचन निभाने के लिए याद किए जाते हैं। आज निभाया वचन किसी भी अर्पण जितना उनका सम्मान है।
परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।