सरस्वती पूजा
विद्या की देवी का पूजन: पुस्तकें, पीले फूल और पहला पाठ
सामान्य विधि — अधिकांश घर
वसंत पंचमी, माघ शुक्ल पंचमी, सुबह। कई लोग नवरात्रि में भी उनकी पूजा करते हैं। मुहूर्त ऐप के त्योहार कार्ड पर दिन दिखता है।
लगभग 30 मिनट
सरस्वती ज्ञान, संगीत और वाणी की देवी हैं। विद्यार्थी अपनी पुस्तकें और वाद्य उनके सामने रखते हैं, परिवार पीला पहनता है, और छोटा बच्चा पहला अक्षर लिख सकता है। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" कह सकते हैं।
इस पूजा की प्रार्थनाएँ
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तैयारी
एक दिन पहले
- पूजा स्थान साफ़ करें, और रखी जाने वाली पुस्तकें, कलम और वाद्य पोंछ लें।
- पीले या सफ़ेद फूल लें, और केसरिया चावल या बूँदी जैसी पीली मिठाई तय करें।
सुबह
- स्नान कर, हो सके तो पीला या सफ़ेद पहनें।
- बच्चों को पास रखें; यह पूजा मुख्यतः उन्हीं के लिए है।
आपको क्या चाहिए
सरस्वती के लिए
- 1सरस्वती का चित्र या मूर्ति
- जितने होंपुस्तकें, कलम और वाद्यसाफ़ और बंद।
- एक मुट्ठीपीले या सफ़ेद फूल
- 1पीला कपड़ा
- 1 थालीकेसरिया चावल, बूँदी या अन्य पीली मिठाई
- कुछफल, मौसम हो तो बेर
पूजा स्थान के लिए
- 1उसे रखने के लिए साफ़ कपड़ालाल या पीला परंपरागत है।
- 1पूजा की थाली
थाली में
- 1रुई की बाती वाला दीयाघी या तिल का तेल।
- 2अगरबत्ती
- एक-एक चुटकीकुमकुम और हल्दी
- थोड़ाचंदनचंदन न हो तो कुमकुम लें।
- 1 बड़ा चम्मचअक्षत — थोड़े कुमकुम में मिले साबुत चावल
- एक मुट्ठीताज़े फूल
- 1चम्मच के साथ स्वच्छ जल का छोटा पात्र
- 1छोटी घंटीवैकल्पिक।
अर्पण के लिए
- थोड़ाफल, गुड़, मिश्री या घर में ताज़ा बना कुछ भी
- 1 या 2 टुकड़ेआरती के लिए कपूरवैकल्पिक; इसकी जगह दीया लिया जा सकता है।
पूजा
शांत होकर बैठें
आसन या मुड़े कपड़े पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके देवता के सामने बैठें। थाली अपने दाहिनी ओर रखें। एक गहरी साँस लें और कुछ मिनट के लिए दिन को रुकने दें।
आचमन — तीन बार जल पिएँ
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ, हर घूँट के साथ पहले तीन नाम बोलें। फिर चौथा नाम बोलते हुए थोड़े जल से दाहिना हाथ धो लें।
ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः। ॐ गोविन्दाय नमः॥केशव, नारायण और माधव को नमस्कार; गोविंद को नमस्कार।स्वयं और स्थान को पवित्र करें
जल में डुबोया एक फूल लेकर यह श्लोक बोलते हुए अपने ऊपर, थाली और पूजा स्थान पर कुछ बूँदें छिड़कें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥पवित्र हो या अपवित्र, किसी भी अवस्था में हो, जो कमलनयन भगवान का स्मरण करता है वह भीतर और बाहर से शुद्ध हो जाता है।दीया जलाएँ
दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।गणेश जी का स्मरण
हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।
ध्यान — देवता का आवाहन
आँखें बंद करके देवता को अपने सामने देखें। उन्हें पधारने का निमंत्रण देते हुए एक चुटकी अक्षत अर्पित करें।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः। ध्यायामि, आवाहयामि॥पुस्तकें और वाद्य रखें
उनके सामने पीला कपड़ा बिछाकर पुस्तकें, कलम और वाद्य रखें। हर एक पर चंदन का बिंदु लगाएँ।
गंध — चंदन
अनामिका उँगली से देवता को चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएँ।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः। गन्धं समर्पयामि॥पुष्प — फूल
फूल देवता के चरणों में एक-एक या कुछ एक साथ अर्पित करें।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः। पुष्पाणि समर्पयामि॥धूप
अगरबत्ती जलाकर देवता के सामने घड़ी की दिशा में तीन बार धीरे से घुमाएँ। घंटी हो तो बाएँ हाथ से बजाएँ।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः। धूपम् आघ्रापयामि॥दीप
दीया उठाकर देवता को दिखाएँ और घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएँ।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः। दीपं दर्शयामि॥नैवेद्य — भोग
भोग देवता के सामने रखें। उसके चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें और हाथ जोड़कर अर्पित करें। एक क्षण रुकें, मानो उसे स्वीकार किया जा रहा हो।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥सरस्वती वंदना
हाथ जोड़कर बच्चों के साथ यह श्लोक कहें।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥जो कुंद, चंद्रमा और हिम जैसी श्वेत हैं, श्वेत वस्त्र धारण किए, श्वेत कमल पर विराजमान, वीणा लिए हैं: जड़ता हरने वाली वे सरस्वती मेरी रक्षा करें।उनका मंत्र जपें
इसे माला या उँगलियों पर 11 या 108 बार जपें।
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥आरती
दीप या कपूर जलाकर उनके सामने दक्षिणावर्त घुमाएँ, परिवार साथ गाए या प्रार्थना करे। दोनों हथेलियों से उसकी ऊष्मा आँखों तक लें।
प्रदक्षिणा — श्रद्धा से परिक्रमा
यह श्लोक बोलते हुए अपने स्थान पर घड़ी की दिशा में तीन बार घूमें (जगह हो तो पूजा स्थान की परिक्रमा करें)।
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे॥पिछले जन्मों में किए गए जो भी पाप हैं, वे भगवान की परिक्रमा के हर कदम के साथ नष्ट हो जाते हैं।क्षमा प्रार्थना
हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।पहला पाठ
छोटे बच्चे से चावल या स्लेट पर पहले अक्षर या "ॐ" लिखवाएँ, बड़े उसका हाथ थामें। बड़े बच्चे कुछ पंक्तियाँ पढ़ें या थोड़ा संगीत बजाएँ। परंपरा में पूजा पूरी होने तक पुस्तकें देवी के पास रहती हैं।
प्रसाद
प्रणाम करें। अर्पित भोग में से थोड़ा प्रसाद के रूप में लें और परिवार में बाँटें। दीये को अपने आप बुझने दें।
उपवास
व्रत आवश्यक नहीं। कुछ लोग पूजा के बाद ही खाते हैं।
करना अच्छा है
- हर बच्चे को अपने हाथ से फूल चढ़ाने दें।
- किसी ज़रूरतमंद बच्चे को पुस्तक या कलम दें।
परंपरा टालती है
- पुस्तकों को न लाँघें और न ज़मीन पर रखें।
- इस दिन को पढ़ाई की छुट्टी न मानें; थोड़ा पढ़ना इसका हिस्सा है।
परंपरा कहती है कि ज्ञान बाँटने से बढ़ता है। आज किसी को सिखाया पाठ भी एक अर्पण है।
परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।