वट सावित्री पूजा
सावित्री की कथा, बरगद पर सूत और दीर्घ दांपत्य की प्रार्थना
सामान्य विधि — अधिकांश घर
उत्तर में ज्येष्ठ अमावस्या पर वट सावित्री; महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट पूर्णिमा। मुहूर्त ऐप के त्योहार कार्ड पर आपकी तिथि दिखती है।
लगभग 40 मिनट
सावित्री ने बुद्धि और दृढ़ता से यम से अपने पति को वापस पाया। विवाहित महिलाएँ दीर्घायु के प्रतीक बरगद की पूजा करती हैं, सूत लेकर परिक्रमा करती हैं, और उनकी कथा सुनती हैं। पास में बरगद न हो तो चित्र या छोटी टहनी स्वीकार्य है। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "ॐ नमः शिवाय" कह सकते हैं।
इस पूजा की प्रार्थनाएँ
Shubham Karoti ›Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›
तैयारी
एक दिन पहले
- निकटतम बरगद ढूँढें, और पूछ लें कि वहाँ सूत और दीप की अनुमति है या नहीं।
- काले चने भिगोएँ और फल तैयार रखें।
सुबह
- स्नान कर त्योहार जैसे वस्त्र पहनें।
- थाली और जल पेड़ के पास ले जाएँ, या घर पर चित्र रखें।
आपको क्या चाहिए
बरगद के लिए
- 1 गुच्छीकच्चा सूत
- 1जल का पात्र
- 1 कटोरीभीगे काले चने
- 1 थालीफल, विशेषकर आम
- थोड़ा-थोड़ाकुमकुम, हल्दी, फूल और दीया
- 1सावित्री-सत्यवान का चित्र, या बरगद की टहनीपेड़ तक न पहुँच सकें तो।
पूजा स्थान के लिए
- 1उसे रखने के लिए साफ़ कपड़ालाल या पीला परंपरागत है।
- 1पूजा की थाली
थाली में
- 1रुई की बाती वाला दीयाघी या तिल का तेल।
- 2अगरबत्ती
- एक-एक चुटकीकुमकुम और हल्दी
- थोड़ाचंदनचंदन न हो तो कुमकुम लें।
- 1 बड़ा चम्मचअक्षत — थोड़े कुमकुम में मिले साबुत चावल
- एक मुट्ठीताज़े फूल
- 1चम्मच के साथ स्वच्छ जल का छोटा पात्र
- 1छोटी घंटीवैकल्पिक।
अर्पण के लिए
- थोड़ाफल, गुड़, मिश्री या घर में ताज़ा बना कुछ भी
- 1 या 2 टुकड़ेआरती के लिए कपूरवैकल्पिक; इसकी जगह दीया लिया जा सकता है।
पूजा
दीया जलाएँ
दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।गणेश जी का स्मरण
हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।
पेड़ की पूजा
जड़ में जल डालें, फिर कुमकुम, हल्दी, फूल, चने और फल अर्पित करें। दीया छाल से सुरक्षित दूरी पर जलाएँ।
सूत लपेटें
तने की 7, 11 या 108 परिक्रमा दक्षिणावर्त करें, चलते हुए सूत लपेटें, पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना के साथ।
कथा सुनें
साथ बैठकर सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें या सुनाएँ: कैसे वे यम के पीछे गईं और अपने प्रश्नों से पति का जीवन जीता।
क्षमा प्रार्थना
हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।व्रत पूरा करें
कथा के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें। चने और फल प्रसाद के रूप में खाएँ; कई लोग शाम तक फल ही लेते हैं।
उपवास
कई महिलाएँ पूजा तक या दिन भर व्रत रखती हैं। अस्वस्थ या गर्भवती ज़रूरत के अनुसार खाएँ।
करना अच्छा है
- पेड़ को पानी दें, और हो सके तो पौधा लगाएँ।
- सावित्री का साहस याद रखें; कथा उनकी बुद्धि की भी है।
परंपरा टालती है
- पेड़ के पास प्लास्टिक या सूत का कचरा न छोड़ें।
- घर लाने के लिए डालियाँ न तोड़ें; गिरी हुई या चित्र लें।
सावित्री ने गिड़गिड़ाया नहीं; तर्क किया और चलती रहीं। यही दृढ़ता इस दिन का सम्मान है।
परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।