दैनिक पूजा
पाँच उपचारों वाली छोटी घरेलू पूजा, किसी भी दिन और किसी भी देवता के लिए
पूरे भारत में समान
सुबह स्नान के बाद, भोजन से पहले। कई लोग शाम को दीया जलाते समय भी करते हैं।
15 से 20 मिनट
यह पंचोपचार पूजा है — पाँच उपचारों से पूजा: चंदन, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य। यह पूरी षोडशोपचार पूजा का रोज़ का रूप है और हर त्योहार की पूजा इसी पर बनती है। जहाँ यह मार्गदर्शिका "आपके इष्ट देवता" कहे, वहाँ उस देवी-देवता का नाम लें जिनकी आप पूजा कर रहे हैं — जैसे इष्टदेवतायै की जगह गणेश जी के लिए गणपतये या लक्ष्मी जी के लिए लक्ष्म्यै कहें। मंत्र न आए तो सच्चे मन से अपने शब्दों में अर्पण करना भी पर्याप्त है।
इस पूजा की प्रार्थनाएँ
Shubham Karoti ›Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›Om Jai Jagdish Hare ›Karpura Gauram ›Shanti Mantra ›
तैयारी
एक रात पहले
- पूजा का स्थान साफ़ करें और चित्र या मूर्ति पोंछ लें।
- दीया, थाली और जल का छोटा पात्र धो लें।
- ताज़ा तेल या घी और नई रुई की बाती तैयार रखें।
सुबह
- स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें।
- ताज़े फूल तोड़ें या लाएँ। पहले उन्हें सूँघें नहीं; वे देवता के लिए हैं।
- नैवेद्य तैयार रखें — फल या थोड़ी मिश्री भी पर्याप्त है।
आपको क्या चाहिए
पूजा स्थान के लिए
- 1इष्ट देवता का चित्र या मूर्ति
- 1उसे रखने के लिए साफ़ कपड़ालाल या पीला परंपरागत है।
- 1पूजा की थाली
थाली में
- 1रुई की बाती वाला दीयाघी या तिल का तेल।
- 2अगरबत्ती
- एक-एक चुटकीकुमकुम और हल्दी
- थोड़ाचंदनचंदन न हो तो कुमकुम लें।
- 1 बड़ा चम्मचअक्षत — थोड़े कुमकुम में मिले साबुत चावल
- एक मुट्ठीताज़े फूल
- 1चम्मच के साथ स्वच्छ जल का छोटा पात्र
- 1छोटी घंटीवैकल्पिक।
अर्पण के लिए
- थोड़ाफल, गुड़, मिश्री या घर में ताज़ा बना कुछ भी
- 1 या 2 टुकड़ेआरती के लिए कपूरवैकल्पिक; इसकी जगह दीया लिया जा सकता है।
पूजा
शांत होकर बैठें
आसन या मुड़े कपड़े पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके देवता के सामने बैठें। थाली अपने दाहिनी ओर रखें। एक गहरी साँस लें और कुछ मिनट के लिए दिन को रुकने दें।
आचमन — तीन बार जल पिएँ
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ, हर घूँट के साथ पहले तीन नाम बोलें। फिर चौथा नाम बोलते हुए थोड़े जल से दाहिना हाथ धो लें।
ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः। ॐ गोविन्दाय नमः॥केशव, नारायण और माधव को नमस्कार; गोविंद को नमस्कार।स्वयं और स्थान को पवित्र करें
जल में डुबोया एक फूल लेकर यह श्लोक बोलते हुए अपने ऊपर, थाली और पूजा स्थान पर कुछ बूँदें छिड़कें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥पवित्र हो या अपवित्र, किसी भी अवस्था में हो, जो कमलनयन भगवान का स्मरण करता है वह भीतर और बाहर से शुद्ध हो जाता है।दीया जलाएँ
दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।गणेश जी का स्मरण
हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।
ध्यान — देवता का आवाहन
आँखें बंद करके देवता को अपने सामने देखें। उन्हें पधारने का निमंत्रण देते हुए एक चुटकी अक्षत अर्पित करें।
ॐ श्री इष्टदेवतायै नमः। ध्यायामि, आवाहयामि॥गंध — चंदन
अनामिका उँगली से देवता को चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएँ।
ॐ श्री इष्टदेवतायै नमः। गन्धं समर्पयामि॥पुष्प — फूल
फूल देवता के चरणों में एक-एक या कुछ एक साथ अर्पित करें।
ॐ श्री इष्टदेवतायै नमः। पुष्पाणि समर्पयामि॥धूप
अगरबत्ती जलाकर देवता के सामने घड़ी की दिशा में तीन बार धीरे से घुमाएँ। घंटी हो तो बाएँ हाथ से बजाएँ।
ॐ श्री इष्टदेवतायै नमः। धूपम् आघ्रापयामि॥दीप
दीया उठाकर देवता को दिखाएँ और घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएँ।
ॐ श्री इष्टदेवतायै नमः। दीपं दर्शयामि॥नैवेद्य — भोग
भोग देवता के सामने रखें। उसके चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें और हाथ जोड़कर अर्पित करें। एक क्षण रुकें, मानो उसे स्वीकार किया जा रहा हो।
ॐ श्री इष्टदेवतायै नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥आरती
कपूर जलाएँ या दीया लेकर आरती गाएँ — ॐ जय जगदीश हरे किसी भी देवता के लिए उपयुक्त है, या अपने इष्ट देवता की आरती गाएँ। देवता के सामने ज्योति को घड़ी की दिशा में घुमाएँ, फिर दोनों हथेलियों से उसकी गरमाहट अपनी आँखों पर लगाएँ।
प्रदक्षिणा — श्रद्धा से परिक्रमा
यह श्लोक बोलते हुए अपने स्थान पर घड़ी की दिशा में तीन बार घूमें (जगह हो तो पूजा स्थान की परिक्रमा करें)।
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे॥पिछले जन्मों में किए गए जो भी पाप हैं, वे भगवान की परिक्रमा के हर कदम के साथ नष्ट हो जाते हैं।क्षमा प्रार्थना
हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।प्रसाद
प्रणाम करें। अर्पित भोग में से थोड़ा प्रसाद के रूप में लें और परिवार में बाँटें। दीये को अपने आप बुझने दें।
करना अच्छा है
- पूजा स्थान और बर्तन साफ़ रखें।
- हर दिन ताज़े फूल और ताज़ा जल लें।
- हो सके तो रोज़ लगभग एक ही समय पर पूजा करें — अवधि से अधिक नियमितता मायने रखती है।
परंपरा टालती है
- ज़मीन पर गिरे या सूँघे हुए फूल अर्पित न करें।
- दीया मुँह से फूँक कर न बुझाएँ; उसे अपने आप बुझने दें या हाथ से हवा करें।
- दीया जलते समय पूजा स्थान की ओर पीठ न करें।
शुरुआत करने का कोई गलत तरीका नहीं है। व्यस्त दिन में दीया जलाना, एक मंत्र बोलना और हाथ जोड़ना भी पूजा है।
परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।