धनतेरस पूजा
दिवाली की पहली शाम: धन्वंतरि, कुबेर और यम का दीप
सामान्य विधि — अधिकांश घर
धनतेरस, आश्विन (अमांत) कृष्ण त्रयोदशी, शाम प्रदोष काल में। मुहूर्त ऐप के त्योहार कार्ड पर समय दिखता है।
लगभग 30 मिनट
दिवाली इसी शाम से खुलती है। परिवार स्वास्थ्य के लिए देवताओं के वैद्य धन्वंतरि, और समृद्धि के लिए लक्ष्मी व कुबेर का पूजन करते हैं, फिर बाहर यम के लिए एक दीप जलाते हैं। धातु का बर्तन खरीदना आम चलन है। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "ॐ धन्वन्तरये नमः" कह सकते हैं।
इस पूजा की प्रार्थनाएँ
Shubham Karoti ›Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›
तैयारी
एक दिन पहले
- घर और प्रवेश द्वार साफ़ करें।
- परिवार खरीदता हो तो छोटा नया बर्तन या सिक्का तय करें; सोना होना ज़रूरी नहीं।
उसी दिन
- द्वार पर रंगोली बनाएँ।
- अन्य दीपों के साथ यम के लिए चार बत्ती का मिट्टी का दीप तैयार रखें।
आपको क्या चाहिए
धनतेरस के लिए
- 1धन्वंतरि, या लक्ष्मी और कुबेर का चित्र
- 1नया बर्तन या सिक्कावैकल्पिक।
- 1तेल के साथ चार बत्ती का मिट्टी का दीप
- 5 या अधिकछोटे दीये
- थोड़ाधनिया और गुड़
- 1 थालीमिठाई और फल
पूजा स्थान के लिए
- 1उसे रखने के लिए साफ़ कपड़ालाल या पीला परंपरागत है।
- 1पूजा की थाली
थाली में
- 1रुई की बाती वाला दीयाघी या तिल का तेल।
- 2अगरबत्ती
- एक-एक चुटकीकुमकुम और हल्दी
- थोड़ाचंदनचंदन न हो तो कुमकुम लें।
- 1 बड़ा चम्मचअक्षत — थोड़े कुमकुम में मिले साबुत चावल
- एक मुट्ठीताज़े फूल
- 1चम्मच के साथ स्वच्छ जल का छोटा पात्र
- 1छोटी घंटीवैकल्पिक।
अर्पण के लिए
- थोड़ाफल, गुड़, मिश्री या घर में ताज़ा बना कुछ भी
- 1 या 2 टुकड़ेआरती के लिए कपूरवैकल्पिक; इसकी जगह दीया लिया जा सकता है।
पूजा
शांत होकर बैठें
आसन या मुड़े कपड़े पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके देवता के सामने बैठें। थाली अपने दाहिनी ओर रखें। एक गहरी साँस लें और कुछ मिनट के लिए दिन को रुकने दें।
दीया जलाएँ
दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।गणेश जी का स्मरण
हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।
ध्यान — देवता का आवाहन
आँखें बंद करके देवता को अपने सामने देखें। उन्हें पधारने का निमंत्रण देते हुए एक चुटकी अक्षत अर्पित करें।
ॐ धन्वन्तरये नमः। ध्यायामि, आवाहयामि॥नया बर्तन रखें
नया बर्तन या सिक्का धोकर चित्र के सामने रखें, उसमें थोड़ा धनिया और गुड़ डालें।
स्वास्थ्य और धन के लिए पूजा
फूल और थोड़ा चंदन अर्पित करें। मंत्र कहें और पहले स्वास्थ्य माँगें; परंपरा इसे पहला धन कहती है।
ॐ धन्वन्तरये नमः॥धूप
अगरबत्ती जलाकर देवता के सामने घड़ी की दिशा में तीन बार धीरे से घुमाएँ। घंटी हो तो बाएँ हाथ से बजाएँ।
ॐ धन्वन्तरये नमः। धूपम् आघ्रापयामि॥दीप
दीया उठाकर देवता को दिखाएँ और घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएँ।
ॐ धन्वन्तरये नमः। दीपं दर्शयामि॥नैवेद्य — भोग
भोग देवता के सामने रखें। उसके चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें और हाथ जोड़कर अर्पित करें। एक क्षण रुकें, मानो उसे स्वीकार किया जा रहा हो।
ॐ धन्वन्तरये नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥क्षमा प्रार्थना
हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।यम दीपम्
संध्या के बाद चार बत्ती का दीप जलाकर मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर रखें। एक बार प्रणाम करें, और भीतर जाते हुए पीछे न देखें। यह अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना है।
दीप जलाएँ
अन्य दीये द्वार और खिड़कियों पर रखें, दिवाली के पाँच दिन खुल गए।
उपवास
व्रत आवश्यक नहीं। कुछ लोग शाम की पूजा तक रखते हैं।
करना अच्छा है
- आज स्वास्थ्य के लिए एक काम करें: जाँच तय करें या सैर शुरू करें।
- दीये पर्दों और बच्चों से दूर रखें।
परंपरा टालती है
- धातु या सोना खरीदने के लिए उधार न लें।
- यम दीप ऐसी जगह न रखें जहाँ गिर सके।
धनतेरस स्वास्थ्य को धन से पहले रखता है। एक दीप, और अपने शरीर की देखभाल, ही इस दिन का अर्पण है।
परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।