‹ पूजा विधि

गोवर्धन पूजा

कृष्ण का उठाया पर्वत, अन्नकूट के अनेक व्यंजन और गायों को धन्यवाद

सामान्य विधि — अधिकांश घर

गोवर्धन पूजा, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, दिवाली के अगले दिन, प्रायः सुबह या दोपहर। मुहूर्त ऐप के त्योहार कार्ड पर दिन दिखता है।

लगभग 30 मिनट, साथ में पकाना

कृष्ण ने इंद्र की वर्षा से ब्रज को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया। परिवार छोटा पर्वत बनाते हैं, अन्नकूट नामक व्यंजनों का भोग लगाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" कह सकते हैं।

इस पूजा की प्रार्थनाएँ

Shubham Karoti ›Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›Om Namo Bhagavate Vasudevaya ›

तैयारी

एक दिन पहले

सुबह

आपको क्या चाहिए

गोवर्धन के लिए

पूजा स्थान के लिए

थाली में

अर्पण के लिए

पूजा

  1. शांत होकर बैठें

    आसन या मुड़े कपड़े पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके देवता के सामने बैठें। थाली अपने दाहिनी ओर रखें। एक गहरी साँस लें और कुछ मिनट के लिए दिन को रुकने दें।

  2. दीया जलाएँ

    दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।

    शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।

    Shubham Karoti ›

  3. गणेश जी का स्मरण

    हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।

    वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।

    Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›

  4. संकल्प — अपना उद्देश्य कहें

    दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।

  5. ध्यान — देवता का आवाहन

    आँखें बंद करके देवता को अपने सामने देखें। उन्हें पधारने का निमंत्रण देते हुए एक चुटकी अक्षत अर्पित करें।

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ध्यायामि, आवाहयामि॥
  6. पर्वत सजाएँ

    पर्वत में फूल और छोटी टहनियाँ लगाएँ, चारों ओर दीये रखें। कृष्ण का चित्र उस पर या पास रखें।

  7. अन्नकूट

    सारे व्यंजन पर्वत के सामने रखें, हर एक पर तुलसी का पत्ता। चारों ओर जल छिड़ककर हाथ जोड़कर अर्पित करें।

  8. परिक्रमा

    जगह हो तो पर्वत की सात परिक्रमा दक्षिणावर्त करें, दूध या जल की पतली धार डालते और उनका नाम जपते हुए।

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

    Om Namo Bhagavate Vasudevaya ›

  9. दीप

    दीया उठाकर देवता को दिखाएँ और घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएँ।

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। दीपं दर्शयामि॥
  10. क्षमा प्रार्थना

    हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।

    आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।
  11. भोजन बाँटें

    अन्नकूट परिवार, पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों को परोसें। गायें हों तो उन्हें ताज़ी घास और गुड़ दें।

उपवास

व्रत आवश्यक नहीं।

करना अच्छा है

परंपरा टालती है

कृष्ण ने लोगों से उसका सम्मान करने को कहा जो सचमुच उन्हें पालता है। साझा भोजन और धरती का स्मरण ही पूरी पूजा है।

परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।

Muhurtha पूजा विधि