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सत्यनारायण पूजा

विष्णु की पारिवारिक पूजा, कथा और शीरे के प्रसाद के साथ

सामान्य विधि — अधिकांश घर

प्रायः पूर्णिमा की शाम; नए घर, विवाह या किसी भी कृतज्ञता के अवसर पर भी। परिवार साथ हो तो कोई भी दिन ठीक है।

कथा सहित लगभग 1 से 1½ घंटे

सत्यनारायण सत्य के स्वामी के रूप में विष्णु हैं। परिवार एकत्र होता है, छोटा मंडप बनता है, पूजा होती है और कथा के पाँच अध्याय पढ़े जाते हैं, फिर सब प्रसाद बाँटते हैं। इसमें पुरोहित आवश्यक नहीं, और प्रसाद बाँटना पूजा जितना ही महत्वपूर्ण है। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः" कह सकते हैं।

इस पूजा की प्रार्थनाएँ

Shubham Karoti ›Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›Om Jai Jagdish Hare ›Shantakaram ›Om Namo Narayanaya ›

तैयारी

एक-दो दिन पहले

उसी दिन

आपको क्या चाहिए

सत्यनारायण के लिए

पूजा स्थान के लिए

थाली में

अर्पण के लिए

पूजा

  1. मंडप बनाएँ

    केले के तने या पत्ते एक छोटी चौकी से बाँधें, साफ़ कपड़ा बिछाएँ और उस पर चित्र रखें। सामने थोड़े चावल पर कलश रखें।

  2. शांत होकर बैठें

    आसन या मुड़े कपड़े पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके देवता के सामने बैठें। थाली अपने दाहिनी ओर रखें। एक गहरी साँस लें और कुछ मिनट के लिए दिन को रुकने दें।

  3. आचमन — तीन बार जल पिएँ

    दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ, हर घूँट के साथ पहले तीन नाम बोलें। फिर चौथा नाम बोलते हुए थोड़े जल से दाहिना हाथ धो लें।

    ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः। ॐ गोविन्दाय नमः॥केशव, नारायण और माधव को नमस्कार; गोविंद को नमस्कार।
  4. स्वयं और स्थान को पवित्र करें

    जल में डुबोया एक फूल लेकर यह श्लोक बोलते हुए अपने ऊपर, थाली और पूजा स्थान पर कुछ बूँदें छिड़कें।

    ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥पवित्र हो या अपवित्र, किसी भी अवस्था में हो, जो कमलनयन भगवान का स्मरण करता है वह भीतर और बाहर से शुद्ध हो जाता है।
  5. दीया जलाएँ

    दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।

    शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।

    Shubham Karoti ›

  6. गणेश जी का स्मरण

    हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।

    वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।

    Vakratunda Mahakaya ›Shuklambaradharam ›Mushikavahana ›

  7. संकल्प — अपना उद्देश्य कहें

    दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।

  8. ध्यान — देवता का आवाहन

    आँखें बंद करके देवता को अपने सामने देखें। उन्हें पधारने का निमंत्रण देते हुए एक चुटकी अक्षत अर्पित करें।

    ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः। ध्यायामि, आवाहयामि॥
  9. गंध — चंदन

    अनामिका उँगली से देवता को चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएँ।

    ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः। गन्धं समर्पयामि॥
  10. पुष्प — फूल

    फूल देवता के चरणों में एक-एक या कुछ एक साथ अर्पित करें।

    ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः। पुष्पाणि समर्पयामि॥
  11. धूप

    अगरबत्ती जलाकर देवता के सामने घड़ी की दिशा में तीन बार धीरे से घुमाएँ। घंटी हो तो बाएँ हाथ से बजाएँ।

    ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः। धूपम् आघ्रापयामि॥
  12. दीप

    दीया उठाकर देवता को दिखाएँ और घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएँ।

    ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः। दीपं दर्शयामि॥
  13. नैवेद्य — शीरा

    शीरा, पंचामृत और फल उनके सामने रखें, हर एक पर तुलसी का पत्ता। चारों ओर थोड़ा जल छिड़ककर हाथ जोड़कर अर्पित करें।

  14. कथा पढ़ें

    सब साथ बैठें और एक व्यक्ति सत्यनारायण कथा के पाँच अध्याय परिवार की भाषा में ज़ोर से पढ़े। हाथ में फूल या अक्षत लेकर सुनें, और हर अध्याय के अंत में अर्पित करें।

  15. आरती

    कपूर जलाकर परिवार के साथ ॐ जय जगदीश हरे गाएँ, और लौ दक्षिणावर्त घुमाएँ। फिर आरती सबको दें ताकि हर कोई उसकी ऊष्मा ले सके।

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  16. प्रदक्षिणा — श्रद्धा से परिक्रमा

    यह श्लोक बोलते हुए अपने स्थान पर घड़ी की दिशा में तीन बार घूमें (जगह हो तो पूजा स्थान की परिक्रमा करें)।

    यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे॥पिछले जन्मों में किए गए जो भी पाप हैं, वे भगवान की परिक्रमा के हर कदम के साथ नष्ट हो जाते हैं।
  17. क्षमा प्रार्थना

    हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।

    आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।
  18. प्रसाद बाँटें

    उपस्थित सभी को शीरा दें, और जो न आ सके उन्हें भी भेजें। परंपरा कहती है कि कोई बिना प्रसाद न जाए, और प्रसाद कभी अस्वीकार न हो।

उपवास

पूजा करने वाले प्रायः उसके पूरा होने तक उपवास रखते हैं, फिर पहले प्रसाद खाते हैं। यह अनिवार्य नहीं है।

करना अच्छा है

परंपरा टालती है

कथा की कहानियाँ एक ही बात पर लौटती हैं: वचन निभाएँ, धन्यवाद दें और बाँटें। यही पूजा है।

परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।

Muhurtha पूजा विधि