लक्ष्मी पूजा
दीपावली की शाम लक्ष्मी और गणेश का घर में स्वागत
सामान्य विधि — अधिकांश घर
दीपावली, आश्विन अमावस्या, शाम के प्रदोष काल में, हो सके तो स्थिर लग्न में। मुहूर्त ऐप के त्योहार कार्ड पर आज का समय दिखता है।
लगभग 45 मिनट
दीपावली की शाम घर में समृद्धि की देवी लक्ष्मी का स्वागत होता है, उनके साथ विघ्नहर्ता गणेश रहते हैं। घर साफ़ होता है, दीप जलते हैं और धन का भी सम्मान होता है: सिक्के, आभूषण और बही-खाते उनके सामने रखे जाते हैं। कोई मंत्र कठिन लगे तो उसकी जगह "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" कह सकते हैं।
इस पूजा की प्रार्थनाएँ
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तैयारी
कुछ दिन पहले
- पूरा घर साफ़ करें, खासकर प्रवेश द्वार; मान्यता है कि लक्ष्मी स्वच्छ और प्रकाशित घर में आती हैं।
- यदि आपके परिवार में हर साल बदलने की परंपरा है तो लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति या चित्र लाएँ।
दीपावली के दिन
- द्वार पर रंगोली बनाएँ; परिवार की परंपरा हो तो भीतर की ओर आते छोटे पदचिह्न भी।
- दीये लगाकर रखें, और खील-बताशे और मिठाई मुहूर्त से पहले तैयार रखें।
आपको क्या चाहिए
लक्ष्मी जी के लिए
- एक-एकलक्ष्मी और गणेश की मूर्ति या चित्र
- 1जल, आम के पत्ते और नारियल वाला कलश
- एक मुट्ठीकमल या लाल और गुलाबी फूलकमल न मिले तो गेंदा भी चलेगा।
- जो होंसिक्के, आभूषण और बही-खाते
- 1 थालीखील, बताशे और मिठाई
- 11 या अधिकतेल या घी के मिट्टी के दीये
पूजा स्थान के लिए
- 1उसे रखने के लिए साफ़ कपड़ालाल या पीला परंपरागत है।
- 1पूजा की थाली
थाली में
- 1रुई की बाती वाला दीयाघी या तिल का तेल।
- 2अगरबत्ती
- एक-एक चुटकीकुमकुम और हल्दी
- थोड़ाचंदनचंदन न हो तो कुमकुम लें।
- 1 बड़ा चम्मचअक्षत — थोड़े कुमकुम में मिले साबुत चावल
- एक मुट्ठीताज़े फूल
- 1चम्मच के साथ स्वच्छ जल का छोटा पात्र
- 1छोटी घंटीवैकल्पिक।
अर्पण के लिए
- थोड़ाफल, गुड़, मिश्री या घर में ताज़ा बना कुछ भी
- 1 या 2 टुकड़ेआरती के लिए कपूरवैकल्पिक; इसकी जगह दीया लिया जा सकता है।
पूजा
वेदी सजाएँ
साफ़ लाल कपड़े पर, सामने से देखने पर बाईं ओर गणेश और दाईं ओर लक्ष्मी रखें। सामने थोड़े चावल पर कलश रखें, और पास में सिक्के, आभूषण और बही-खाते रखें।
शांत होकर बैठें
आसन या मुड़े कपड़े पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके देवता के सामने बैठें। थाली अपने दाहिनी ओर रखें। एक गहरी साँस लें और कुछ मिनट के लिए दिन को रुकने दें।
आचमन — तीन बार जल पिएँ
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर तीन बार पिएँ, हर घूँट के साथ पहले तीन नाम बोलें। फिर चौथा नाम बोलते हुए थोड़े जल से दाहिना हाथ धो लें।
ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः। ॐ गोविन्दाय नमः॥केशव, नारायण और माधव को नमस्कार; गोविंद को नमस्कार।स्वयं और स्थान को पवित्र करें
जल में डुबोया एक फूल लेकर यह श्लोक बोलते हुए अपने ऊपर, थाली और पूजा स्थान पर कुछ बूँदें छिड़कें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥पवित्र हो या अपवित्र, किसी भी अवस्था में हो, जो कमलनयन भगवान का स्मरण करता है वह भीतर और बाहर से शुद्ध हो जाता है।दीया जलाएँ
दीया जलाकर देवता के दाहिनी ओर रखें और उसे हाथ जोड़ें।
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदः। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देने वाली तथा दुर्बुद्धि का नाश करने वाली दीपज्योति को नमस्कार।गणेश जी का स्मरण
हर पूजा विघ्नहर्ता गणेश जी से शुरू होती है। हाथ जोड़कर यह श्लोक एक बार बोलें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥हे वक्रतुंड, विशालकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणेश, मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न करें।संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में थोड़ा जल, अक्षत और एक फूल लें। अपना नाम, हिंदू पंचांग की आज की तिथि और पूजा का उद्देश्य कहें — जैसे परिवार की कुशलता के लिए। फिर जल को भूमि पर या थाली में छोड़ दें। आज का पूरा संकल्प पढ़ने के लिए "संकल्प करें" दबाएँ।
ध्यान — देवता का आवाहन
आँखें बंद करके देवता को अपने सामने देखें। उन्हें पधारने का निमंत्रण देते हुए एक चुटकी अक्षत अर्पित करें।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। ध्यायामि, आवाहयामि॥गंध — चंदन
अनामिका उँगली से देवता को चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएँ।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। गन्धं समर्पयामि॥पुष्प — फूल
फूल देवता के चरणों में एक-एक या कुछ एक साथ अर्पित करें।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। पुष्पाणि समर्पयामि॥धूप
अगरबत्ती जलाकर देवता के सामने घड़ी की दिशा में तीन बार धीरे से घुमाएँ। घंटी हो तो बाएँ हाथ से बजाएँ।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। धूपम् आघ्रापयामि॥दीप
दीया उठाकर देवता को दिखाएँ और घड़ी की दिशा में तीन बार घुमाएँ।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। दीपं दर्शयामि॥नैवेद्य — भोग
भोग देवता के सामने रखें। उसके चारों ओर थोड़ा जल छिड़कें और हाथ जोड़कर अर्पित करें। एक क्षण रुकें, मानो उसे स्वीकार किया जा रहा हो।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। नैवेद्यं निवेदयामि॥नमस्तेऽस्तु — महालक्ष्मी की स्तुति
यह श्लोक कहते हुए उनके चरणों में कमल या लाल फूल और एक सिक्का अर्पित करें।
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥हे महामाया, श्रीपीठ पर देवताओं द्वारा पूजित, शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।उनका मंत्र जपें
माला पर 108 बार, या जितना हो सके, जपें, और मन में उन बातों को याद करें जिनके लिए आप कृतज्ञ हैं।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥आरती
कपूर जलाकर परिवार के साथ ॐ जय लक्ष्मी माता गाएँ, और लौ दक्षिणावर्त घुमाएँ। फिर आरती सबको दें ताकि हर कोई उसकी ऊष्मा ले सके।
प्रदक्षिणा — श्रद्धा से परिक्रमा
यह श्लोक बोलते हुए अपने स्थान पर घड़ी की दिशा में तीन बार घूमें (जगह हो तो पूजा स्थान की परिक्रमा करें)।
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणपदे पदे॥पिछले जन्मों में किए गए जो भी पाप हैं, वे भगवान की परिक्रमा के हर कदम के साथ नष्ट हो जाते हैं।क्षमा प्रार्थना
हाथ जोड़कर, जो भी गलत हुआ या छूट गया उसके लिए क्षमा माँगें। हर पूजा इसी से पूर्ण होती है।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न ही पूजा करना; हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मंत्र, क्रिया या भक्ति से हीन जो भी पूजा मैंने की, वह पूर्ण हो।दीप जलाएँ
वेदी से जलते दीये हर कमरे, द्वार और खिड़कियों पर ले जाएँ। सुरक्षित हो तो एक दीया रात भर जलता रखें।
प्रसाद
प्रणाम करें। अर्पित भोग में से थोड़ा प्रसाद के रूप में लें और परिवार में बाँटें। दीये को अपने आप बुझने दें।
उपवास
कुछ लोग शाम की पूजा तक उपवास रखते हैं। यह अनिवार्य नहीं है।
करना अच्छा है
- पूजा के समय मुख्य द्वार खुला या प्रवेश प्रकाशित रखें।
- पड़ोसियों और अपने यहाँ काम करने वालों को मिठाई दें।
परंपरा टालती है
- दीयों को पर्दों और बच्चों से दूर रखें, और बंद कमरे में बिना देखरेख जलता न छोड़ें।
- परंपरा में पूजा के तुरंत बाद उधार देने या घर बुहारने से बचते हैं।
कहते हैं लक्ष्मी वहाँ ठहरती हैं जहाँ व्यवस्था, कृतज्ञता और उदारता हो। साफ़ घर, एक दीया और सच्चा धन्यवाद ही इसका सार है।
परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। अपने परिवार की रीति का पालन करें।